KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

मुड़ धर रोये किसान

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मुड़ धर रोवए किसान
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  देख तोर किसान के हालत,
      का होगे  भगवान !
  कि मुड़ धर रोवए किसान,
  ये का दिन मिले भगवान !!

  पर के जिनगी बड़ सवारें
अपन नई करे फिकर जी !
  बजर  दुख उठाये तन म,
  लोहा बरोबर जिगर जी !!
  पंगपंगावत बेरा उठ जाथे ,
  तभ होथे सोनहा बिहान !
कि मुड़ धर रोवए किसान !!

अच्छा दिन आही कहिके ,
हमला बड़ भरमाये जी l
गदगद ले बोट पागे,
अब ठेंगवा दिखाये जी l
बिश्वास चुल्हा म बरगे ,
भोंदू बनगे किसान ll
कि मुड़ धर रोये किसान l

अन कुवांरी हम उपजायेन ,
कमा के बनगेन मरहा जी l
पोट ल अउ पोट करदीस ,
हमला निचट हड़हा जी ll
नांगर छोड़ सड़क म उतरगे,
लगावत हे बाजी जान l

दूजराम साहू “अनन्य”
निवास -भरदाकला (खैरागढ़)
जिला – राजनांदगाँव( छ. ग .)

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