कविता 38 मुझे तो जीना है- मनीभाई नवरत्न

कविता 38
मुझे तो जीना है
■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■
चलो आज
हो चलें तन्हा।
कब से तड़प रहा है,
कुछ कहने को;
ये दिल नन्हा।
शहर से दूर
सागर किनारे,
मिलने जाना है खुद से।
जो पास होके भी होता नहीं
छू कर आना है
वजूद से।
कब तक दौड़ूगां
आखिर
किस मंजिल की तलाश है?
वो सब छोड़ जाना है
जो भी मेरे पास है।
तरंगों के जाल में
मैं महसूस करता हूं
फंसा हुआ।
मुझे याद करने हैं
वो पल
जब था हंसा हुआ ।
मेरी रफ़्तार
रूकती क्यों नहीं
चाहता हूं थम जाना
किनारों का मोह टूटा
मेरी इच्छा-सूची में
शामिल चुकी है,
बह जाना।
क्या ये सूचक है?
आत्मघात के
पर मुझे तो जीना है
वो जिंदगी
जो अब तक जी न सका हूं।
मनीभाई”नवरत्न”

(Visited 1 times, 1 visits today)

मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

प्रातिक्रिया दे