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नैतिक हिन्दी वर्णमाला पर कविता

यह कविता हिंदी वर्णमाला पर आधारित है

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नैतिक हिन्दी वर्णमाला पर कविता

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अ से अनार ,आ से आम ,

पढ़ लिख कर करना है नाम।

इ से इमली , ई से ईख ,

पहले भइया इनको सीख ।

उ से उल्लू ,ऊ से ऊन,

हम सबको पढ़ने की धुन ।

ऋ से ऋषि की आ गई बारी,

पढ़नी है किताबें सारी।

ए से एडी , ऐ से ऐनक ,

पढ़ने से जीवन में रौनक ।

ओ से ओखली , औ से औरत ,

पढ़ने से मिलती है शोहरत ।

अं से अंगूर , दो बिंदी का अः ,

स्वर हो गए पूरे हः हः ।

क से कबूतर , ख से खरगोश ,

पढ़ लिखकर आएगा जोश ।

ग से गमला , घ से घड़ी ,

पढ़े लिखे हम घड़ी-घड़ी ।

ङ खाली आगे अब आये ,

आगे की ये राह दिखाए ।

च से चरखा , छ से छतरी ,

देश के है हम सच्चे प्रहरी ।

ज से जहाज , झ से झंडा ,

ऊँचा रहे सदा तिरंगा ।

ञ खाली आगे अब आता ,

अभी न रुकना हमें सिखाता ।

ट से टमाटर , ठ से ठठेरा ,

देखो समय कभी न ठहरा ।

ड से डमरू , ढ से ढक्कन ,

समय के साथ हम बढ़ाये कदम ।

ण खाली अब हमें सिखाए ,

जीवन खाली नहीँ है भाई।

त से तख्ती , थ से थन ,

शिक्षा ही है सच्चा धन ।

द से दवात , ध से धनुष ,

शिक्षा से हम बनें मनुष ।

न से नल , प से पतंग ,

हम तुम सब पढ़े संग-संग ।

फ से फल , ब से बतख ,

ज्ञान के फल को अब तो चख ।

भ से भालू , म से मछली ,

शिक्षा जग में सब से भली ।

य से यज्ञ , र से रथ ,

पढ़ लिखकर सब बनों समर्थ ।

ल से लट्टू , व से वकील ,

ज्ञान से सबका जीतो दिल ।

श से शलजम , ष से षट्कोण,

खुलकर बोलो तोड़ो मौन ।

स से सपेरा , ह से हल ,

श्रम से मिलता मीठा फल ।

क्ष से क्षत्रिय हमें यही सिखाए ,

दुःख में कभी नहीँ घबराएँ ।

त्र से त्रिशूल , ज्ञ से ज्ञानी ,

बच्चों अब हुई खत्म कहानी ।

✍✍ *डी कुमार–अजस्र(दुर्गेश मेघवाल,बून्दी/राज.)*

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