नमन है मेरे गुरुवर-केवरा यदु “मीरा “

नमन है मेरे गुरुवर-केवरा यदु “मीरा “

शिक्षक ईश समान है, कर गुरु का सम्मान।
अक्षर अक्षर जोड़ कर,बाँटे जो नित ज्ञान।
बाटे जो नित ज्ञान,शिष्य को योग्य  बनाते।
ज्ञान ज्योति ले हाथ,सदा सत राह दिखाते।
मात पिता  भगवान,बने बच्चों का रक्षक।
नमन  करें सौ बार,ब्रम्ह का रुप है शिक्षक ।।
 
गुरुवर तुमको है नमन, चरणों में शत बार।
झोली भरदो ज्ञान से, मैं मति मंद गँवार।
मैं मति मंद गँवार,चरण में हमको लेना।
उर में भर दो ज्ञान,उज्जवल राहें देना ।
हो मेरे भगवान, मात पितु हो तुम दिनकर।
शत शत बार प्रणाम, चरण में मेरे गुरुवर।।
 
गुरुवर ब्रम्हा  रूप है,गुरु ही विष्णु महेश।
भवसागर से तारते, हरे शिष्य के क्लेश।
हरे शिष्य के क्लेश,गुरूवर है सुख दाता।
दिखलाते सद् राह,बनकर भाग्य विधाता।
दया धर्म उपकार,सिखाते हैं वो प्रभुवर।
शीश धरूँ नित पाँव, नमन है मेरे गुरुवर।।
 
केवरा यदु “मीरा “
राजिम
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