KAVITA BAHAR
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नारी का सम्मान करो

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नारी का सम्मान करो



लावणी छंद
वेद ग्रंथ में कहें ऋचाएँ, जड़ चेतन में ध्यान धरो।.
जननी भगिनी बिटियाँ पत्नी, नारी का सम्मान करो।..

नारी से नर नारायण हैं, नारी सुखों की खान है।
प्रसव वेदना की संधारक, नारी कोख़ बलवान है।
ममता की मूरत है जग में,सुचिता शील वरदान है।
ज्वाला रूप धरे नारी तब, लागे ग्रहण का भान है।
गगन बदन भेदन क्षमता है, मुक्त कंठ गुणगान करो…
जननी भगिनी बिटियाँ पत्नी, नारी का सम्मान करो।…

सती रूप भी सहज कहाँ था,पुरुष भला क्या सह सकता!
काल विधुर परिणाम करे तो, चँद बरस नहीं रह सकता।
दो कुल की संस्कारी सरिता, क्या गंगा सा बह सकते?
करता और बखान कलम से, बिना शब्द क्या कह सकते?
श्वेद गार कर बाग सजाती,सह नारी श्रमदान करो…
जननी भगिनी बिटियाँ पत्नी, नारी का सम्मान करो।…

अस्थि तोड़ती प्रसव वेदना, अबला ही सह सकती है।
सफल चरण की नेक कहानी,गृहणी ही कह सकती है।
कभी अडिग हो चट्टानों सी, कभी नयनजल बहती है।
विषम घड़ी में ढाल बनें वह, पिय वियोग में जलती है।
त्याग तपस्या नारी कारण, जीवन का बलिदान करो।
जननी भगिनी बिटियाँ पत्नी, नारी का सम्मान करो।…

==डॉ ओमकार साहू मृदुल 04/10/20==

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