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तम्बाकू निषेध दिवस पर मनीष शुक्ल की कविता

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तम्बाकू निषेध दिवस पर मनीष शुक्ल की कविता

नशा मत करना,
नशा है मृत्य समान,
तम्बाकू ने ली

असमय मानव जान।


शौक- शौक में तम्बाकू

खाने लगा अनजान,
शरीर खोखला करने लगा,
मन मंदिर हुआ वीरान।


धीरे धीरे सामने आए,
तम्बाकू के दुष्परिणाम,
डॉक्टर के पास जाना पड़ा,
हुआ गलती का भान।


फिर कसम खाई मैंने,
छोड़ दिया नशे का साथ,
तम्बाकू मुक्त हो गया,
मेरा भारत महान।।

मनीष शुक्ल, लख़नऊ

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2 Comments
  1. Deep Chandra Joshi says

    Very Nice

  2. Amita says

    Fabulous poem