KAVITA BAHAR
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नई साल -नये संकल्प

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नई साल -नये संकल्प

साल अठारह कहें विदा अब,
स्वागत साल उन्नीस का।
कर्मपंथ पर बढ़ो साथियों,
लक्ष्य बनाकर बीस का।

संकल्प नए लेने हमको,
परोपकार सदभाव के।
देश बनाना हमको मिलकर,
सबके मिटा दुर्भाव को।

नव सोपान विकास चढ़े हम,
नई साल संकल्पी हो।
रोजगार के अवसर पाएँ,
शिक्षा सतत विकल्पी हो।

देश नीति परदेश नीति भी,
वतन हेतु सुखकारी हो।
लोकतंत्र मजबूत बने यह,
संवेदक अधिकारी हो।

जय जवान ये जय किसान के,
संगत जय विज्ञान कहें।
मजदूरों हित सुविधा होवे,
बिटिया के अरमान रहे।

माता पिता व वृद्धजनों की,
सुविधा व मर्यादा सभी।
नारी के सम्मान के खातिर,
पीछे हटना नहीं कभी।

संकल्प करें हम मतदाता हैं,
नेता अच्छे चुन लाएँ।
संसद में जो बैठ सभा में,
ठोस विधेयक ला पाएँ।

सवा अरब हम संकल्पी है,
आतंकी है लघु जमात।
हमे चुनौती दे दे कोई,
सोचे पहले वह बिसात।

संविधान का मान बढाएँ,
नये साल संकल्प करें।
शासन और प्रशासन का हम,
मिलकर काया कल्प करें।

नये साल,नव संकल्पों में,
नेह प्रीत की रीत पले।
संसकार मर्यादा वाले,
सत साहित संगीत चले।

सीमित खर्चित आयोजन हो,
बदखर्ची से आम बचें।
अर्थ व्यवस्था अपनी सुधरे,
स्वर्ण पखेरू नाम जँचे।

बाबू लाल शर्मा “बौहरा”

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