KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

निषादराज के दोहे

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*निषादराज के दोहे*

(1) *दामिनी*
देखा जबसे दामिनी,चकाचौंध अब नैन।
होश हुआ मदहोश अब,ढलने को अब रैन।।

(2) *व्योम*
व्योम हुआ गहरा बहुत,बादल छाये आज।
नहीं मिला अब चैन भी,नहीं हुआ कुछ काम।।

(3) *पुलकित*
माँ का आशीष है मिला,जीवन में उल्लास।
पुलकित मेरा तन हुआ,हुआ मुझे विश्वास।।

(4) *द्रवित*
नैन द्रवित मेरा हुआ,खुशियाँ मिले हजार।
मन मेरा शीतल हुआ, पा कर अपना प्यार।।

(5) *संकट*
संकट मोचन नाम है,महाबली हनुमान।
लाल कहाए अंजनी,रघुवर के हित जान।।

(6) *आशीष*
माँ की ममता से बड़ा,माँ का है आशीष।
इन्हें नमन करता रहूँ,मान इन्हें जगदीश।।

(7) *उपकृत*
उपकृत हूँ माँ आपकी,मैं तेरा संतान।
जीवन तूने है दिया,करूँ सदा गुणगान।।

(8) *साक्ष्य*
सत्य मार्ग पर चल पड़ो,साक्ष्य यहाँ भगवान।
वो ही अपना मान है,और वही ईमान।।

(9) *पुष्ट*
हृष्ट-पुष्ट तन को रखो,कर के नित तुम योग।
मन भी चंचल होय जब,काया होय निरोग।।

(10) *निर्णय*
निर्णय करना आप ही,करना जो हो काम।
तभी सफलता हैं मिले,मिले मान औ नाम।।

बोधन राम निषादराज”विनायक”
सहसपुर लोहारा,जिला-कबीरधाम(छ.ग.)

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