KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

नर्स पर कविता- पवन मिश्र

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नर्स पर कविता- पवन मिश्र

नर्स जिसे प्यार से हम सभी उन्हें
सिस्टर कहकर बुलातें हैं ।
अपना सुख-दुख भुलाकर
हम सबका ख्याल रखती हैं
रोते हुए को हंसाती हैं
घावों पर मरहम लगाती हैं ।।

अपना न होकर भी
अपना हो जाती हैं
कभी सर को छूना
तो कभी पट्टी बदलना
समय -समय पर दवा लेना
ऐसा हम सबको समझाती हैं ।।


कभी बूढ़े बाप की बेटी बनकर
तो कभी बीमार मां की बेटी बनकर
कुछ दिन में अपना बन जाती हैं ।
होते हैं जब हम विदा अस्पतालों से
भीगी -भीगी पलकों से
आँखों में आँसू दे जाती हैं ।।


     पवन मिश्र कृति

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