ओ नारी- मनीभाई नवरत्न

ओ नारी- मनीभाई नवरत्न

जिन्दगी चले ना, बिन तेरे ओ नारी!
उठा ली तूने,  सिर अपने  ऐसी जिम्मेदारी ।

मर्दों ने नाहक किये खुद पे ऐतबार ।
सच तो यह है कि नारी होती जग की श्रृंगार ।
महक ऐसे , फूल जैसे खिल उठे क्यारी क्यारी ।
रोशन होता रहे तेरा जी,  फैले ज्ञान की चिनगारी ।।

संयमित रह, सुशोभित रह
तुझे ईश्वरीय वरदान है ।
घर बनाती हरेक मकान  को।
तेरे साये में, तेरा परिवार है।


समाज की बीड़ा उठाने को तोड़ चली चारदीवारी ।
रोशन होता रहे तेरा जी,  फैले ज्ञान की चिनगारी ।।

नारी! तू चीज नहीं कोई उपभोग की ।
तुमसे टिकी है मर्यादा आज भी लोग की ।
ना बढ़े तेरे कदम  उस ओर पे
जिस पथ पर आधुनिकता  है ढोंग की।


तेरे एक गलत के फिराक में है यहाँ कई शिकारी ।
रोशन होता रहे तेरा जी,  फैले ज्ञान की चिनगारी ।।

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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

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