KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

ओ प्यारी ओ प्यारी

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ओ प्यारी ओ प्यारी

ओ प्यारी , ओ प्यारी
जीत ली तुमने दिल हमारी ।
आ मिलकर प्यार करें हम
देखते रह जाए दुनिया सारी।
ओ प्यारी, ओ प्यारी
ना मैंने किसी से चाहा था ।
ना तुमने किसी से प्यार की।
मैं अभी तक कुंवारा हूं
तू अभी तक है कुंवारी।
ओ प्यारी, ओ प्यारी
चंदन जैसी खुश्बू ,पवित्र है गंगा जैसी तू ।
जिस गली से गुजरेगी वहां की हट जाए महामारी ।
ओ प्यारी, ओ प्यारी
मैं तो अभी तक जवां हूं ,है तू सुंदर कलियों जैसी।
मैं कितना मीठा हूं तू है कितनी खारी ।
आई एम सॉरी ओ प्यारी ओ प्यारी