छत्तीसगढ़िया कवि दूजराम साहू के द्वारा रचित “पांच दिन बर आये देवारी” आप सबका मन मोह लेगी, इस कविता का आनंद लीजिये।

पांच दिन बर आये देवारी
_________________________
    माटी के सब दीया बारबो
         एसो के देवारी म। 
    जुरमील सब खुशी मनाबो 
         एसो के देवारी म।। 
     पांच दिन बर आये देवारी
        अपार खुशी लाये हे । 
     घट के भीतर रखो उजियारा
         सब ल पाठ पढ़ाये हे। 
     ईर्ष्या, द्वेष सब बैर भगाबो
         एसो के देवारी म।। 
    जुआ, तास, नशा ,पान
     घर बर ये नरकासुर हे ।
    बचत के सब आदत डालो
    यही जिनगी के बने गून हे। 
    भुरभूंगीया पन छोड़ो सब
       एसो के देवारी म।। 
    धन-लक्ष्मी, महा-लक्ष्मी 
      नारी ल सब मानो जी। 
   कोई दू:शासन न सारी खिचे 
    ईही ल भाई दूज जानो जी। 
   नारी सम्मान के ले प्रतिज्ञा 
         एसो के देवारी म।। 
  
    गाय दूध, गोबर सिलिहारी 
     पूजा बर कहा ले पाहू जी। 
    पर्यावरण, गाय नई बचाहू त
      जीवन भर पछताहू जी। 
     एक पेड़ सब झन पालो 
          एसो के देवारी म।। 
       संस्कृति ले सीख मिलथे 
    जीनगी  के कला सीखाथे जी। 
        मया – प्रेम -प्रीति बढ़ाथे
         बिछड़े ल मिलाते जी। 
     फेशन में घलो संस्कृति बचाबो
          एसो के देवारी म।। 
दूजराम साहू 
निवास -भरदाकला 
तहसील- खैरागढ़ 
जिला- राजनांदगांव (छ .ग.) 
8103353799
   
     
   
  
(Visited 4 times, 1 visits today)