पागल पर कविता – मनीभाई नवरत्न

पागल पर कविता

कल से पागल मानसिक विकार से ।
आज घायल हैं समाज की दुत्कार से।
ऐसी कजरा जिसमें श्वास हैं ।
पागलखाने फुटपाथ ही आवास है ।


जो बसाए रहे घर संसार ।
वही संसार करती है अस्वीकार।
चलते फिरते बने मनोरंजन का साधन।
क्योंकि घृणित है भोजन वसन वासन।


हुजूर  के लिए आनंददायक पागल शब्द ।
असभ्य संज्ञा पाकर भी हम निस्तब्ध।
तेरे लिए जिंदगी में निराशा की भरमार।
हम पर तो जिंदगी ही तनाव का भंडार।


फिर भी समाज के रखवाले
कभी तो हमें भी बुलाओ ।
खोई हुई मान सम्मान मन की शांति दिलाओ ।
हमें भी समाज की प्रगति करना है ।
पर पहल यही कि हमें सभ्य समाज में रहना है।

  • मनीभाई नवरत्न
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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

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