KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

झूठ भी एक हकीकत है

झूठ भी एक हकीकत है झूठ एक सच्चाई है झूठ भी एक हकीकत है झूठ के दम पर सत्य भी हार जाता है झूठ का संसार से गहरा नाता है झूठ बोलना एक कला है झूठ ने अनगिनत बार

चांद पर कविता

चांद पर कविता सफेद चांद धवल चन्द्र रात्रि मेंआए जब श्वेत मेघों पे ,देखते ही बनता है नजाराचांदी जैसा मेघ चमकतालगता है बड़ा ही प्यारा ।खो जाता हूं मनोहर दृश्य

सरसी छंद में कविता : पेड़ लगाओ-महेंद्र देवांगन माटी

सरसी छंद में कविता : पेड़ लगाओ-महेंद्र देवांगन माटी आओ मिलकर पेड़ लगायें, सबको मिलेगी छाँव ।हरी-भरी हो जाये धरती, मस्त दिखेगा गाँव ।।1।। पेड़ों से

शीत प्रकोप – मनीभाई नवरत्न

शीत प्रकोप - मनीभाई नवरत्न धुंधला भोरकुंहरा चहुं ओरकुछ तो जला.जाने क्या हुई बलाक्या हुआ रात?कोई बताये बात।ख़ामोश गांवठिठुरे हाथ पांवढुंढे अलाव।अब भाये ना

सुधा राठौर जी के हाइकु

सुधा राठौर जी के हाइकु छलक गयापूरबी के हाथों सेकनक घट★बहने लगींसुनहरी रश्मियाँविहान-पथ★चुग रहे हैंहवाओं के पखेरूधूप की उष्मा★झूलने लगींशाख़ों के झूलों

तृष्णा पर कविता

तृष्णा पर कविता तृष्णा कुछ पाने कीप्रबल ईच्छा हैशब्द बहुत छोटा  हैपर विस्तार  गगन सा है।अनन्त नहीं मिलता छोर जिसकाशरीर निर्वाह की होतीआवश्यकतापूरी होती है।

प्रियतम कितने प्यारे हो

प्रियतम कितने प्यारे हो प्रियतम कितने प्यारे हो,मेरी आँखों से पूछो।पढ़ लो इन अँखियों में बस एक नजर देखो।बसे हो श्वांस श्वांस में न बिछुडे जन्मसात में,आरजू

निमाई प्रधान’क्षितिज’ के हाइकु

निमाई प्रधान'क्षितिज' के हाइकु ** *हे रघुवीर!**मन में रावण है* *करो संहार ।* ***सदियाँ बीतीं* *वहीं की वहीं टिकीं* *विद्रूपताएँ ।* ***जाति-जंजाल**पैठा