30 अक्टूबर विश्व बचत दिवस : पैसों की बचत के महत्व पर कुमार जितेन्द्र की कविता

पैसों की बचत के,
महत्व को समझाना l
मनुष्य के अनमोल,
जीवन को बचाना ll

रोजगार के अवसरों की, कम होती संख्या l
तीव्रता से बढ़ रही है, बेरोजगारों की संख्या ll
 आज युवा बन रहे हैं, नशीले पदार्थों के ग्राही l
 बिन पैसे कैसे होगी, युवाओं की सुनहरी राही ll

पैसों की बचत के, म
हत्व को समझाना l
मनुष्य के अनमोल,
जीवन को बचाना ll

 आधुनिकता के चकाचौंध में, बढ़ गई महंगाई l
 बिन पैसों के कैसे बजाएँ, बिटिया की शहनाई ll
 तुलनात्मक के दौर में, पैसों पर नियंत्रण करना l
 प्रतिस्पर्धा की भावना को, त्याग करना सिखाना ll

 पैसों की बचत के,
महत्व को समझाना l
मनुष्य के अनमोल,
जीवन को बचाना ll

 ब्याज की छाया में, कहीं भूल न जाएं मूलधन l
 निन्यानवे के फेरों में, हम कहां ढूंढेंगे मिश्रधन ll
 वर्तमान में पैसों की, बचत बन गई चुनौती l
 नियंत्रण के अभाव में, लग न जाए पनौती ll

पैसों की बचत के,
महत्व को समझाना l
मनुष्य के अनमोल,
जीवन को बचाना ll
 ✍?
कुमार जितेन्द्र
(कवि, लेखक, विश्लेषक, वरिष्ठ अध्यापक – गणित) 
साईं निवास मोकलसर, तहसील – सिवाना, 
जिला – बाड़मेर, राजस्थान l 
मोबाइल न. 9784853785

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