KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

पंचायत पर कविता

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पंचायत पर कविता 

पंचायत के बीच में ,  ले सच की सौगंध ।
माँग दिव्य सिंदूर दूँ  , थाम रहा मणिबंध ।।
थाम रहा मणिबंध ,  हाथ ये कभी न छोड़ूँ ।
जो भी हो परिणाम , प्रेम का बंध न तोडूँ ।।
कह ननकी कवि तुच्छ , पंच बस करें इनायत ।।
प्रेम रहा है जीत , दस्तखत दे  पंचायत ।

पंचायत मजबूत जब ,  सुधरेगा हर गाँव ।
सपने देखे सुनहरे ,  रहे सुमत की छाँव ।।
रहे सुमत की छाँव ,  मगर उल्टा है होता ।
मगरमच्छ घडियाल , पेट भर खाके सोता ।।
कह ननकी कवि तुच्छ , बंद कैसे हो रवायत ।
स्वप्न करे साकार , स्वस्थ हो हर पंचायत ।।

पंचायत निर्णय करे , सुनकर सारे कथ्य ।
सबकी होती एकमत ,   सत्य सभी के तथ्य ।।
सत्य सभी के तथ्य , बंद हो हर हंगामा ।
कहीं खुशामदखोर , न पहने शुचिता जामा  ।
कह ननकी कवि तुच्छ  , सत्य की रहे सियासत ।।
परिवर्तित व्यवहार ,  मान पाये पंचायत ।।

  • रामनाथ साहू ” ननकी ” मुरलीडीह
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