KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

कविता बहार बाल मंच ज्वाइन करें @ WhatsApp

@ Telegram @ WhatsApp @ Facebook @ Twitter @ Youtube

पर्यावरण पर दोहे

0 348

आज पर्यावरण एक जरूरी सवाल ही नहीं बल्कि ज्वलंत मुद्दा बना हुआ है लेकिन आज लोगों में इसे लेकर जागरूकत है। ग्रामीण समाज को छोड़ दें तो भी महानगरीय जीवन में इसके प्रति खास उत्सुकता नहीं पाई जाती। परिणामस्वरूप पर्यावरण सुरक्षा महज एक सरकारी एजेण्डा ही बन कर रह गया है। जबकि यह पूरे समाज से बहुत ही घनिष्ठ सम्बन्ध रखने वाला सवाल है। जब तक इसके प्रति लोगों में एक स्वाभाविक लगाव पैदा नहीं होता, पर्यावरण संरक्षण एक दूर का सपना ही बना रहेगा।

पर्यावरण पर दोहे

hindi doha || हिंदी दोहा
hindi doha || हिंदी दोहा

प्रकृति सृजित सब संपदा, जनजीवन आधार।
साधे सुविधा सकल जन ,पर्यावरण सुधार।।1।।

जीवन यापन के लिये,शुद्ध हवा जलपान।
पर्यावरण रक्षित है ,जीव जगत सम्मान।।2।।

धरती, गगन, सुहावने,  पावक  और समीर।
पर्यावरण शुद्ध रहे , रहो सदा गंभीर।।3।।

विविध विटप शोभा बढी, सघन वनों के बीच।
पर्यावरण है सुरक्षित, हरियाली के बीच।।4।।

रहे सुरक्षित जीव पशु, वन शोभा बढ जाय।
शुद्ध पर्यावरण रहे,  सकल व्याधि मिट जाय।।5।।

बारिद बरसे समय पर, ऊखिले खेत खलिहान।
पर्यावरण सुहावना, मिले कृषक को मान।।6।।

पर्यावरण रक्षा हुई, प्रण को साधे शूर।
धरती सजी सुहावनी,मुख पर चमके नूर।।7।।

पेड़ काट बस्ती बसी ,पर्यावरण विनाश।
बढा प्रदूषण शहर में,कैसे लेवे सांस।।8।।

गिरि धरा के खनन में,बढा प्रदूषण आज।
पर्यावरण बिगड़ गया, कैसे साधे काज।।9।।

संख्या अगणित बढ गई , वाहन का अति जोर।
पर्यावरण बिगड़ रहा   , धुँआ घुटा चहुँओर।।10।।

ध्वनि प्रदूषण फैलता, बाजे डी.जे.ढोल।
दीन्ही पर्यावरण में, कर्ण कटु ध्वनि घोल।।11।।

पर्यावरण बिगाड़ पर, प्रकृति बिडाड़े काज।
अतिवृष्टि व सूखा कहीं, कहीं बाढ के ब्याज।।12।।

दूषित हो पर्यावरण, फैलाता है रोग।
शुद्ध हवा मिलती नहीं, कैसे साधे योग।।13।।

जन जीवन दुर्लभ हुआ,छाया तन मन शोक।
पर्यावरण बिगाड़ पे,कैसे लागे रोक।।14।।

चेत मनुज हित सोचले, पर्यावरण सुधार।
रक्षा मानव जीव की, पर्यावरण सुधार।।15।।

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.