KAVITA BAHAR
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पेड़ चालीसा-बाबू लाल शर्मा

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पेड़ चालीसा-बाबू लाल शर्मा

पहले देव गणेश मनाते।
शारद वनज पेड़ गुण गाते।।1
वृक्ष संत सम धरा विराजे।
वन उपवन सुन्दरता साजे।।2


वृक्ष सदा ही मेघ बुलाते।
कानन खेती ये महकाते।।3
पेड़ शान है धरती जंगल।
तरुवर छाँया शुभ अरु मंगल।।4
वन में कान्हा गाय चराई।
वन वन भटके थे रघुराई।।5


वन मे राम लखन दो भाई।
सिय सुकुमारी साथ सिधाई।।6
छल शकुनी पासे पटके थे।
पाण्डव भी वन में भटके थे।।7


ऋषि मुनि करे तपस्या वन में।
गिरि कंदरा कुटी छावन में।।8
वन में वन्यजीव अरु पौधे।
कंद मूल फल दुख अवरोधे।।9
सरिता सर झीलें जलदायी।
झरने नाले वन सुखदायी।।10


पेड़ घने होते वन अंदर।
वन्य जीव विहग अरु बंदर।।11
वृक्ष देवता मान समाने।
सर्वस दाता दानी माने।।12


वन वृक्षो से धरती सजती।
जड़ी बूटियाँ औषध मिलती।।13
गोंद फूल फल छाँया पत्ती।
इमारती लकड़ी भी मिलती।।14
प्राणवायु प्राणी को देते।
बदले गैस कार्बन लेते।।15


जीते जी देते ही देते।
दातारी ये कभी न लेते।।16
वन वृक्षों की यह दातारी।
नित देखें ऐसे उपकारी।।17


पृथ्वी पर्यावरण सँवारे।
घर प्रहरी से लगते द्वारे।।18
बड़े पेड़ बुजुर्ग स्वजन सम।
नव पौधे पालें सुत सम हम।। 19
मात पिता की याद अमर कर।
वृक्षारोपण सहज सरलतर।।20


जन्म दिवस प्रिय जन का आवे।
ऐसी अवसर पेड़ लगावें।।21
शादी या शुभ अवसर यादें।
रहें सदा यदि पेड़ लगादें।।22


मोक्षधाम,चिकित्सालय में।
पेड़ लगे वन विद्यालय में।।23
सबके हित में जगह बनाकर।
घर उपवन में पेड़ लगाकर।।24
पुण्य कमालो,याद बनालो।
हैं उपकारी पेड़ लगालो।।25

पेड़ चालीसा-बाबू लाल शर्मा


नीबू जम्बु आम फलदायी।
बरगद पीपल सद सुखदायी।।26
नीम करील रोग उपचारी।
शीशम बाँस काठ उपकारी।।27


है खेजड़ली सींगर वाली।
मरु भूमि की शान निराली।।28
तपे रोहिड़ा संत समाना।
उत्तम कल्प वृक्ष को माना।।29
वन शहतूती रेशम निपजे।
काजु नारियल द्रुमदल उपजे।।30


वन पौधे मानव हित फलते।
पशुधन वन्यजीव भी पलते।।31
नमन उन्हे जो पेड़ लगाए।
सिर के बदले वृक्ष बचाए।।32


वन और वन्य जीव संरक्षित।
पेड़ पेड़ भी होवें रक्षित।।33
पर्यावरण संतुलन रखते।
श्वाँस श्वाँस हम खूब परखते।।34
ग्रीन इफेक्ट विशेष उबारे।
सोच क्यों न हम वनज सँवारे।।35


पंचवटी हर जगह बनाओ।
सिय रघुराई दर्शन पाओ।।36
वृक्ष वृक्ष में ईश निवसते।
वन वन में रघुनाथ विचरते।37
कान्हा की बंशी की तानें।
कैर कदम्ब वृन्द वन माने।।38


वृक्ष वनों हित लिख चौपाई।
शर्मा बाबू लाल सुनाई।।39
चालीसा वन वृक्ष हितैषी।
मानवता हित करनी ऐसी।।40
करले मानव प्रीत कमाई।
मनुता हित वन वृक्ष मिताई।।41


बाबू लाल शर्मा “बौहरा”
सिकंदरा 303326
दौसा,राजस्थान 9782924479

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