चोंका -फूल व भौंरा

फूल व भौंरा

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बसंत पर
फूल पे आया भौरा 
बुझाने प्यास।
मधुर गुंजन से
भौरा रिझाता
चूसता लाल दल
पीकर रस
भौंरे है मतलबी
क्षुधा को मिटा
बनते अजनबी
फूल को भूल
छोड़ दी धूल जान
उसे अकेला।
शोषको की तरह
मद से चूर ।
तन मन कालिमा
किन्तु फिर भी
निशान नही छोड़ा
ठहराव की ।
भोग्या ही समझता
नहीं चाहता
फूल फलने लगे।
उसकी चाह
लुटता रहे मजे
जब वो चाहे ।
फुल से वो खेलेगा
कली को छेड़
अंतस को पीड़ा दे
मुरझा देता
फिर फूल सी स्त्री
प्रतीक्षारत
पुनः आगमन  की
उषा से संध्या
भौरे का बेवफाई
सहती रही
कहती बसंत से
हे ऋतुराज!
तू भेजा हरजाई
विरह पीड़ा
जैसे काटती कीड़ा
प्रेम परीक्षा
दे गयी अब शिक्षा
मिट जाना है
पंखुड़ी धरा गिरी
फूल का प्रेम
सौ फीसदी है खरा
फल डाल का
कोई अनाथ नहीं
वो एक गाथा
भौरे की अत्याचार
फूल की सच्चा प्यार


✍मनीभाई”नवरत्न”
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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़