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जनसंख्या वृद्धि की कहानी

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जनसंख्या वृद्धि की कहानी

स्वार्थ – पूर्ण जीवन के आनंद में मानव हो गया अंधा,
काटते वन – वृक्ष को और करते रोजगार – धंधा।
जनसंख्या वृद्धि से लोगों में ये शामत आई है,
कम होते संसाधन से विश्व में संकट छाई है।
दूर करेंगे इस समस्या को ये मौका हमें नहीं गंवानी,
चलाकर अभियान रोकेंगे, जनसंख्या वृद्धि की कहानी।

जनसंख्या वृद्धि की कहानी - कविता बहार - हिंदी कविता संग्रह

कल-कारखाने और जंगलों की कटाई से समस्याओं का होता उदय,
संसाधनों के अति – दोहन से कंपीत होता धरा का हृदय।
संसाधनों के कमी से होता है पर्यावरण को हानि,
चलाकर अभियान रोकेंगे हम, जनसंख्या वृद्धि की कहानी।

भ्रष्टाचार – आतंकवाद सभी जगह फैला है,
लालच-स्वार्थ के कारण मानव का मन हो गया मैला है।
संसाधनों के अति – दोहन से दूषित हो गया वायु – मिट्टी और पानी,
चलाकर अभियान रोकेंगे हम, जनसंख्या वृद्धि की कहानी।

बाल – विवाह बाल-मजदूरी की समस्या है चरम पर,
अशिक्षा – कुपोषण है फैला फिर भी मानव है भरम पर।
हो गई धरती खोखला और गर्म कैसे कटेगी ये जिन्दगानी,
चलाकर अभियान रोकेंगे, जनसंख्या वृद्धि की कहानी।

यातायात – दुर्घटना और भारी भीड़ से होते हैं सड़क – जाम,
बढ़ती आबादी से बढ़गई – महंगाई और नहीं मिलता हर किसी को काम।
जनसंख्या वृद्धि और संसाधनों का अति – दोहन ये है सब मानव की मनमानी,
चलाकर अभियान रोकेंगे, जनसंख्या वृद्धि की कहानी।

देख पृथ्वी में मानव दंगल अब लोग जाना चाहते हैं मंगल,
वन-पहाड़ – नदी कर दिए नष्ट और संसार बन गया प्रदूषित जंगल।
संभल जाओ यही है मौका अकिल कहता है अपनी जुबानी,
चलाकर अभियान रोकेंगे, जनसंख्या वृद्धि की कहानी।

बेमौसम बरसात तो कहीं है मरूस्थल – निर्जन,
नदी सुख गया हवा रूक गया अब खिलते नहीं हैं बागों में चमन।
मानव सुधर जावो अगर पृथ्वी पर रहना है,
कोशिश करने से मिलेगी सफलता यह अकिल का कहना है।
सुलझाकर इन समस्याओं को एक नया इतिहास है बनानी,
चलाकर अभियान रोकेंगे, जनसंख्या वृद्धि की कहानी।

—– अकिल खान रायगढ़ जिला – रायगढ़ (छ. ग.) पिन – 496440.

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