KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

प्रकृति का इंसाफ- मोहम्मद अलीम


प्रकृति का इंसाफ


1.उदयाचल से अस्ताचल तक,
कैसी ये वीरानी है |
उत्तर से दक्षिण तक देखो ,
मानव माथ पर परेशानी है ||


2. पूरब से चली दनुज पुरवाई ,
मानव मानव का नाशक बनकर |
खड़ा है द्वारे एक विषाणु
सृष्टि में नर पिशाचक बनकर ||


3.चीन वुहान का एक विषाणु ,
संक्रामक संक्रमण फैलाया है |
विश्व स्वास्थ्य संगठन में नामित हो,
कोविड 19 महामारी कहलाया है ||


4.जापान, ईटली, फ्रांस, ईरान,
शक्ति संपन्न महानायक |
विध्वंसी लघुतर विषाणु ने ,
महाशक्तियो को जख्म दिया पीड़ादायक ||


5.कायनात में शक्ति परीक्षा,
दिव्य, अस्त्र-शस्त्र परमाणु बम से |
सारी शक्तियां संज्ञा -शून्य हुई ,
प्रकृति प्रदत विषाणु के भ्रम से ||


6.अटल, अविचल, जीवनदायिनी ,
वसुधा का सीना चीर दिया |
दोहन किया युगो- युगो तक,
प्रकृति को अक्षम्य पीर दिया ||


7.सभ्य,सुसंस्कृत बन विश्व पटल पर ,
कर रहे नित हास -परिहास |
त्राहिनाद गूंज रहा चहुं ओर ,
अब प्रकृति कर रही अट्टाहास ||


8.देव ,दानव, ब्रह्म, मुनी के,
तरकश में कोई तीर नही |
पोप, मौलाना, गुरूवर, निहंग,
बचा सके ऐसा कोई पीर नही ||


9.सृष्टि के झंझावत में बहकर ,
क्षितिज ने प्राचीर मान लिया |
पारावर की लहरो ने भी,
आज अलौकिक विप्लव गान किया ||


10.ध्वनि,धूल,धुंआ, धूसर मुक्त आवरण,
तामसी पर्यावरण दे रहा उपहार |
अमिय बरसा रही प्रकृति,
दानव सीख रहे सौम्य ,शील व्यवहार ||


11.नगपति,कान्तार,हिमशिखा ने,
खग, मृग, अहि का मान किया |
सरसिज खिले, निर्झरिणी मचली,
रत्नगर्भा ने अभयदान दिया ||


12.द्रुमदल के ललाट शिखर पर,
मराल, कलापी, कोयल कूंजे |
सरिता का पावन निर्मल जल,
क्षणप्रभा की चमक से गूंजे ||


13. वसुंधरा के सच्चे सपूत ,
पुलिसकर्मी और सेनानी हैं |
चिकित्सक और परिचारिका ही,
श्रद्धा सुमन के सच्चे शैलानी हैं |


14.धन-धान्य,उद्योग,अर्थव्यवस्था,
तकनीकी का अब भान नही |
दया, रहम, मानव कल्याण,
वीर सपूतो का गान यही ||


15.देवतुल्य है अतुल्य कंचन काया,
परहित सरिस धरम है सच्ची माया |
जननी जन्मभूमी की ममतामयी छााया,
विहंगम प्रकृति ने, सुमन श्रृंगार सजाया ||

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