प्रलयकाल – मनीभाई नवरत्न

सुना था ,
प्रलयकाल के बारे में ,
कि हुआ था जल प्लावन ।।

आज जाने क्यों?
सिहर उठा है मन,
करवटें लेता है बार-बार,
गहन रात्रि में , उनींदीपन में।
टटोलते मेेेेेेरे हाथ
अपने प्राणसम पिया को ।
जैसे ही होता,
उसके होने का आभास
मानो पतवार मिली हो ।
मझधार जीवन नैइयां में,
यही आसरा, यही किनारा ।।

फिर चौंकता ,
कहाँ हैं मेरे शिशु!!
और तसल्ली करता कि,
सुरक्षित है मेरे संचित बीज।
मध्य रात्रि में अचानक,
क्यों महसूस करने लगा ,
कि मैं ही हूं वो मनु
जो गुजर रहा है पारावार से ।।

हां ! यह वही दौर है ।
स्वरूप में परिवर्तन बेशक,
पर हालात हैं वहीं।
बाहर कदम रखते ही ,
सुनता हूँ
डुब रहे हैं नाव औरों के।
जिनके संकट की घड़ी में
जहाँ हम असमर्थ हैं,
मात्र मूकदर्शक है।।

पर कुछ देवतुल्य
लगे हैं दिनरात,
जोखिम में डाले स्वयं को।
जब वे लौटते अपनी नैइयां
बजती है तालियाँ
“सबसे छोटा.. पर बड़ा सम्मान”।
पर कहीं कुछ नमकहराम
देते हैं ताने,
करते हैं बरसात पत्थर का
हैरान करता ये दृश्य,
इससे बढ़कर साक्ष्य नहीं,
नीचता माटीपुतलों के
साक्षात दर्शन स्वार्थपरता की।।

धीरे से थमेगा
ये उठी हुई लहरें।
ग्रास निवाला ना पाकर
काल का हो जाना है इंतकाल।
चूंकि परिवर्तन का भी,
होता है परिवर्तन।।

कभी जो सन्नाटा छाये
कुछ क्षणों के लिए
समझना नहीं कि
ये सूचक है शांति के।
अक्सर तूफान से पहले,
छा जाता है सूनापन।
जब तक भोर की किरणें
माथे नहीं गिरें
और सुनाई न दें मुर्गे की बांग,
यही समझना,
टला नहीं है प्रलयकाल।।
रचना तिथि : 21 अप्रैल 2020
*_मनीभाई नवरत्न_*
*बसना, छत्तीसगढ़*

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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

This Post Has 2 Comments

  1. मनीभाई नवरत्न

    धन्यवाद सर

  2. बाबू लाल शर्मा बौहरा

    बहुत ही सुन्दर सृजन
    बार बार पढ़ने का मन करे
    ऐसी इबारत
    वाह सर
    साधुवाद
    — बाबू लाल शर्मा बौहरा’विज्ञ’

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