वर्षा ऋतु विशेष कविता

प्रथम फुहार पर कविता – सुकमोती चौहान रुचि

प्रथम फुहार पर कविता

वर्षा ऋतु विशेष कविता
वर्षा ऋतु विशेष कविता

आया शुभ आषाढ़, बदलने लगे नजारे |
भीषण गर्मी बाद, लगे घिरने घन प्यारे ||
देखे प्रथम फुहार, रसिक अपना मन हारे |
सौंधी सरस सुगंध, मुग्ध हैं कविवर सारे ||
सूचक है ग्रीष्मांत का, सुखद प्रथम बरसात यह |
चंचल चितवन चाप को, मिला महा सौगात यह ||

टपकी पहली बूँद, गाल पर मेरे ऐसे |
अति अपूर्व अहसास, अमृत जलकण हो जैसे ||
थिरक रहा मन मोर, हुआ अतिशय मतवाला |
कृष्ण रचाये संग, रास लीला बृजबाला ||
धरती लगती तृप्त है , गिरे झमाझम मेह है |
शांत चराचर जग सभी, बरसा भू पर नेह है ||

हरा भरा खुशहाल, मातु धरती का आँचल |
उगे घास चहुँ ओर, गरजते घन घन बादल |
हरियाली चहुँ ओर, हरित धरती की चूनर |
प्रकृति करे श्रृंगार, लगा पत्तों की झूमर |
धरती माँ के कोख में, फसल अकुंरित हो रहे |
गर्भवती धरती हुई, सब आनंदित हो रहे ||

सुकमोती चौहान रुचि

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