प्रेम ही जीवन है- पवन मिश्र

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प्रेम ही जीवन है

हे प्रिय मैं तुमसे कुछ कहता हूँ
हाँ आज फिर कुछ लिखता हूँ
हाँ आज फिर कुछ लिखता हूँ।
एक तड़प रहती है मिलन की
तो एक तड़प रहती है जुदाई की
दोनों के बीच में मैं पिसता हूँ
हाँ आज फिर कुछ लिखता हूँ।


तुम हो तो जीवन है
तुम हो तो है रवानी
तुम हो तो प्यार है
तुम हो तो है जिंदगानी
तुमसे हर दिन हमारा वैलेनटाइन है
है हर साँस तुम्हारा हमारा
तुम हमारे दिल में हो
उम्मीद करू कि मैं भी तुम्हारे दिल में रहता हूं
हां आज फिर कुछ लिखता हूँ।


हर दिन अपना वसन्त हो
हर रात हो अपनी होली
हर नर नारी के दिल में एक ऐसी आग हो
जो वतन के लिए खेल दें खूनों की होली
हे प्रिय मैं हर देशवासी को ये संदेशा कहता हूँ
हाँ मैं आज फिर कुछ लिखता हूँ ।।


पवन मिश्र

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