KAVITA BAHAR
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प्रेम है जीवन का आधार

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प्रेम है जीवन का आधार

एक सत्य जीवन का, प्रेम जीवन का आधार।
स्नेह प्रेम की भाषा समझे, ये सारा संसार ।

एक उत्तम फूल धरा पर, जो खिल सकता,वो है प्रेम का फूल।
मानव हृदय में प्रस्फुटित होता, प्रेम में क्षमा हो जाती हर भूल।

प्रेम पूर्णिमा के चांदनी जैसी, करती शीतलता प्रदान।
कभी सूर्य की किरणों सम, तेज ताप कर देती महान।

प्रेम में सहनशीलता ,प्रेम में समर्पण का भाव।
प्रेम पिता का प्यार है ,औैर प्रेम ममता की छांव ।

प्रेम के फूल से महक सकता है, ये सारा संसार।
प्रेम मिटाए नफरत को औैर मिटाए बैर की दीवार।

मानव मानसिकता में परिवर्तन, प्रेम से ही संभव है।
मानवता का आधार प्रेम है, जहां प्रेम वहां मानव है।

प्रेम परोपकार भाव से,मानवता की ओर ले जाए।
पाशविक वृत्ति से दूर निकाले , सच्चा मानव हमें बनाए।

अतिशयोक्ति नहीं है ये सब , पूर्ण सत्य है प्यार।
प्रेम ही तो होता है , हम सब का जीवन आधार ।

रीता प्रधान,रायगढ़