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पुलवामा को भूल न जाएँ

पुलवामा
आतंकी घटना पर
३०मात्रिक मुक्तक (१६,१४ पर यति)
में रचना

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पुलवामा को भूल न जाएँ

पुलवामा को भूल न जाएँ,
. आतंकी शैतानी को।
याद रखे सम्मान करें हम,
. एक एक बलिदानी को।
काशमीर तो स्वर्ग रहेगा,
. भारत माँ का मान सदा।
मिटा मान हम तेरा देंगें,
. पाक मान मनमानी को।

मात भारती बलिवेदी हित,
सत संकल्प कराना है।
नापाकी आतंकी को अब,
बिना विकल्प मिटाना है।
सत्ता धीशों खुली छूट दो,
रक्त हमारा उबल रहा।
रोज रोज की आफत काटें,
नक्शा नया बनाना है।

खूनी घूँटे पीकर रहले,
अपनी यह तासीर नहीं।
वीर रवानी रोक सके वह,
दुनिया में प्राचीर नहीं।
सेना के बंधन तो खोलो,
सारी दुनिया देखेगी।
काशमीर है वतन अमानत,
आतंकी जागीर नहीं।

कैसे भूलेंगे पुलवामा,
. ज्वार उठेगा बलिदानी।
नाम मिटेगा आतंकी का,
. नहीं सहेंगे शैतानी।
गिन गिन कर हम ब्याज वसूलें,
. तेरी हर मनमानी का।
आज खौलता रक्त हमारा,
. तत्पर देनें कुर्बानी।

नापाक पड़ौसी आतंकी है,
विश्व समूचा जान रहा।
भारत तेरी हर गतिविधि को,
वर्षों से पहचान रहा।
मत छेड़े सिंह सपूतों को,
खुद की तू औकात देख।
मातृभूमि हित मरे मार दें,
भारत का अरमान रहा।
.
देश धरा हित बलिदानों का,
अमर शहीदी मान रहे।
देश अखंड रहेगा अपना,
बस इतना अरमान रहे।
वीर सपूती कुर्बानी हित,
जन गण मन संकल्पित हो।
आतंक रहित धरा हो जाए,
तभी हमारी शान रहे।


बाबू लाल शर्मा “बौहरा” विज्ञ
सिकंदरा,दौसा,राजस्थान

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