KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

पुस्तकों का आश्रय पाकर

इस रचना में पुस्तकों के महत्त्व का बखान मिलता है | साथ ही पुस्तकें किस तरह से हमारे जीवन को दिशा दे सकती हैं की ओर इशारा किया गया है |

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पुस्तकों का आश्रय पाकर

पुस्तकों का आश्रय पाकर

तुम जो चाहे बन सकते हो |

चीर कर अज्ञान के तम को

ज्ञान मार्ग पर बढ़ सकते हो |

संस्कारों की पूँजी पाकर

तुम जो चाहे बन सकते हो |

चीरकर आधुनिकता की बेड़ियाँ

आदर्श राह पर बढ़ सकते हो |

आदर्शों की पूँजी लेकर

तुम जो चाहे बन सकते हो |

चीर कुविचारों की बेड़ियाँ

सच की राह पर बढ़ सकते हो |

आध्यात्म का आश्रय लेकर

तुम जो चाहे कर सकते हो |

चीर भौतिक सागर की लहरों को

मोक्ष मार्ग पर बढ़ सकते हो |

पुस्तकों का आश्रय पाकर

तुम जो चाहे बन सकते हो |

चीर कर अज्ञान के तम को

ज्ञान मार्ग पर बढ़ सकते हो ||

रचयिता – अनिल कुमार गुप्ता ” अंजुम “

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