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प्यार का पहला खत पढ़ने को

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प्यार का पहला खत पढ़ने को

प्यार का पहला खत पढ़ने को* तड़पी है यारी आँखें,
पिया मिलन की* चाह में अक्सर रोती है सारी आँखें।

सुधबुध खोकर जीता जिसने प्रीत का* रास्ता अपनाया
प्रेम संदेशा पहुँचाये* वो जन – जन तक प्यारी आँखें।

कठिन डगर पनघट की जिसने समझा अक्सर दूर रहा
है* लक्ष्य भेदने में सक्षम अवचेतन वह तारी आँखें।

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कलयुग में हो जायें आओ हम द्वापर सा कृष्ण प्रिये
वही बनेगा श्याम यहाँ अब है जिसकी न्यारी आँखें।

मौन की* भाषा बड़ी सहज है जो पढ़ना इसको जाने
ज्ञान सरोवर से अंतर्मन भरती महतारी आँखें।

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✒कलम से
राजेश पाण्डेय अब्र
    अम्बिकापुर

कविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद

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