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प्यासा पंछी-प्रेमचन्द साव

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प्यासा पंछी
मन है उदास भटकता फिरे ।
जैसे प्यासा पंछी उड़ता फिरे ।
मन को ना कोई बांध सके।

तो खुले आकाश की खोज करे ।
मन की उड़ान खुशियों की पुकार करे ।
जैसे प्यासा पंछी उड़ता फिरे ।

फूलों में भौंरे जैसे गुंजन करे ।
मन की इच्छा वैसे ही हिलोरे करे ।
जैसे प्यासा पंछी उड़ता फिरे ।

प्रकृति की सुंदरता सावन पूरा करे ।
अँधेरे को दूर जैसे दीया करे।
जैसे प्यासा पंछी उड़ता फिरे ।
जैसे प्यासा पंछी उड़ता फिरे ।
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रचनाकार-प्रेमचंद साव
बसना,8720030700
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