चैत्र कृष्ण एकम होली धुलेंड़ी वसंतोत्सव Chaitra Krishna Ekam Holi Dhulendi Vasantotsav

रंगों की बहार होली कविता

रंगों की बहार होली कविता

चैत्र कृष्ण एकम होली धुलेंड़ी वसंतोत्सव Chaitra Krishna Ekam Holi Dhulendi Vasantotsav

रंगों की बहार होली, खुशियों की बहार होली
अल्हड़ों का खुमार होली, बचपन का श्रृंगार होली

होली के रंगों में भीगें , आपस का प्यार होली
रिश्तों की जान होली, दिलों का अरमान होली

प्रेयसी का श्रृंगार होली, प्रियतम का प्यार होली
अंग – अंग खुशबू से महकें , प्रेम का इजहार होली

सैयां की बैंयां का हार होली, अरमानों का आगाज़ होली
आशिकों का प्यार होली, मुहब्बत का इजहार होली

गुलाल से रोशन हो आशियाँ, दिलों में पलता प्यार होली
कभी पिया का इन्तजार होली, कहीं खिलती बहार होली

कहीं इश्क़ का इजहार होली, कहीं नफरत पर वार होली
खुदा की इबादत होली, खुदा पर एतबार होली

पालते जो दिलों में मुहब्बत , उन पर निसार होली
उम्मीदों का ताज होली, रिश्तों का रिवाज होली

कुदरत का करिश्मा होली, प्रकृति का प्यार होली
प्यार की जागीर होली, ख्वाहिशों का संसार होली

रंगों की बहार होली, खुशियों की बहार होली
अल्हड़ों का खुमार होली, बचपन का श्रृंगार होली

होली के रंगों में भीगें , आपस का प्यार होली
रिश्तों की जान होली, दिलों का अरमान होली

मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

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10 thoughts on “रंगों की बहार होली कविता”

  1. अनिल जी बहुत ही सुंदर रचना है यह

  2. प्राची

    नारी विषय पर आपकी यह रचना काफी प्रभावी है.

  3. सारिका

    उत्तम रचना. गुप्ता जी आपकी सोच बहुत उत्तम है.

  4. प्रमोद कुमार

    उत्तम रचना अनिल जी आप धन्यवाद के पात्र हैं |

  5. डॉ .राजेश कुमार

    बहुत ही सुंदर रचना अनिल जी

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