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राष्ट्रीय एकता,चारों दिशा में -स्नेहलता

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राष्ट्रीय एकता

राष्ट्रीय एकता,चारों दिशा में,         

खुली सबा में,सारे जहां में

जश्ने आज़ादी है,तिरंगा लहराया   

वंदेमातरम्

गूंजे वतन में गूंजे चमन में         

गूंजे फिजाओं में


जग-गण-मण का गायन       

करें हिंदू मुस्लिम सारे

पूरब,पश्चिचम,उत्तर       

दक्षिण तक गगन हमारे

एकता बाना है,भेद मिटाना है

वंदेमातरम्…….


धरती माँ की संतानें सब       

धरती माँ को प्यारी

हिंदू,मुस्लिम,सिक्ख,ईसाई         

धरती की फुलवारी

सींचकर शोणित से, जान लुटाना है

वंदेमातरम्……..


भारत सोने की चिड़िया है       

राम-कृष्ण की भूमि

उसका जीवन पावन जिसने         

भारत माटी चूमी

हाथ ले रजकण को ,माथ लगाना है

वंदेमातरम्…..

स्नेहलता “स्नेह”सीतापुर, अम्बिकापुर (छ. ग.)

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