रातोरात शोहरत मिल जाए मुझको

रातोरात शोहरत मिल जाए मुझको।
ऐसी मोहब्बत मिल जाए मुझको ।
फिर मरने का डर क्या है ?
फिर ऊँची उमर में रखा क्या है ?
जब मनचाहा चाहत मिल जाए मुझको ।।
गुजरे जमाना, उजड़े फसाना।
फिर भी सांस वैसी हैं ।
बिखरे  मन, उजड़े चमन ,
फिर भी प्यास वैसी है ।
चाहे बार बार टूटे आस ,पर राहत मिल जाए मुझको ।।
कई रातें ,अरमानों की बारातें ,गुजरे तनहाई में।
कुछ पुराने कुछ नहीं अफसाने आज ही परछाई में ।
झूमे हम सारी रात ऐसी दावत मिल जाए मुझको ।।
रातों रात शोहरत मिल जाए मुझको।।
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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

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