रे पिया !काहे न धीर धरे

रे पिया !काहे न धीर धरे।
सोच-सोचके क्यों तिल-तिल मरे।
कब तक छाये रहे दुख की बदली ।
कभी तो लेंगे अंगड़ाइयां ।
बदल जाएंगे जश्न में तेरी हर एक छोटी तनहाइयां।
अनजानी अनसुनी आहट पर काहे तू डरे ।
रेत सा  छूटता है हाथ से सब कुछ।
पर मेरा नाम साथ छूटेगा।
मायूस हो क्यों तुम ऐसे भला
आखिर कब तक हालात रूठेगा ।
हर दिन पल छिन पंछी नई उड़ान भरे ।
रे पिया काहे ना धीर धरे…
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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

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