KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

रोकेंगे हम बाल मजदूरी

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर कविता।

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रोकेंगे हम बाल- मजदूरी

Bal-majduri

कोमल हाथों से चलाता औजार कोई उसको न रोका,
माँ – बाप का उठ गया साया दे गया बचपन धोखा।
तपती सुरज की गर्मी और प्यास से सुखा गला,
दो वक्त की रोटी के लिए बचपन – मजदूरी करने चला।
नन्हें हाथों से आँसू पोंछ करते मालिक की आज्ञा पूरी,
हो रहे इन पर जुल्मों सितम के लिए, रोकेंगे हम बाल – मजदूरी।

किस्मत के हाथों मजबूर बालक बन गया बाल मजदूर,
खाते गाली अगर हो गई गलती फिर भी इसको नहीं है गुरूर।
सोंचता बाल- मजदूर मैं भी जाऊँ स्कूल काश मैं भी पढ़ता,
बेचारा क्या करे वो अपनी गरीबी हालात से है लड़ता।
गरीब बच्चों के लिए है कंपकपाती सिकुड़न भरी रात,

अमीरों के लिए स्वेटर – हिटर है जरुरी,
हो रहे इन पर जुल्मों सितम के लिए, रोकेंगे हम बाल – मजदूरी।

कोई खिलौना कोई सिनेमा कोई देखें मेला,
देकर खुद को दिलासा ये कंकड़ियों के साथ है खेला।
चाय – अखबार बेच साफ करता मेज- ग्लास और थाली,
अगर कोई गलती हो जाए तो खाता मालिक से गाली।
काश इसकी हर ख्वाहिश होती अब पुरी,
हो रहे इन पर जुल्मों सितम के लिए, रोकेंगे हम बाल – मजदूरी।

नहीं मिला कुछ तो भुखा पेट सो गया,
खाली पेट पिकर पानी सिसक सिसक कर रो गया।
करता सेवा मालिक का कहता हर-पल जी हुजूर,
ढांढस बांधले मन में जब भी देखे वो बादाम- किशमिश और खजूर।
कहते ये सो जाता कहाँ है मैय्या मोरी,
हो रहे इन पर जुल्मों सितम के लिए, रोकेंगे हम बाल – मजदूरी।

बचपन ने दबा दिया इनकी कल्पना,
बाल – मजदूर ने जो देखा था सपना।
आओ दें हम इनका भरपूर साथ,
खुशियों से भर जाए इनका दिन और रात।
हम करेंगे इनकी पुरी ख्वाहिश जो रह गई है अधूरी,
हो रहे इन पर जुल्मों सितम के लिए, रोकेंगे हम बाल – मजदूरी।

अकिल खान रायगढ़ जिला – रायगढ़ (छ. ग.) पिन – 496440.

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