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रोला छंद [सम मात्रिक] कैसे लिखें

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रोला छंद [सम मात्रिक] विधान – 24 मात्रा, 11,13 पर यति, यति से पहले वाचिक भार 21 या गाल (अपवाद स्वरुप 122 या लगागा भी) और यति के बाद वाचिक भार 12 लगा या 21 गाल l कुल चार चरण, क्रमागत दो-दो चरणों में तुकांत l प्रत्येक चरण यति पर दो पदों में विभाजित हो जाता है l

hindi sahityik class || हिंदी साहित्यिक कक्षा
hindi sahityik class || हिंदी साहित्यिक कक्षा

पहले पद के कलों का क्रम निम्नवत होता है –
4+4+3 (चौकल+चौकल+त्रिकल) अथवा
3+3+2+3 (त्रिकल+त्रिकल+द्विकल+त्रिकल)

दूसरे पद के कलों का क्रम निम्नवत होता है –
3+2+4+4(त्रिकल+द्विकल+चौकल+चौकल) अथवा
3+2+3+3+2 (त्रिकल+द्विकल+त्रिकल+त्रिकल+द्विकल)

उदाहरण :
नागफनी की बाग़ बनी हो जब अँगनाई,
घूमे लहू लुहान देश की ही तरुणाई l
फिर पाँवों में डाल चले जो कविता पायल,
बोलो मेरे मीत न हो कवि कैसे घायल l

– ओम नीरव

विशेष : दोहा के विषम और सम चरणों का क्रम परस्पर बदल देने से सोरठा छंद बनता है और उसकी प्रत्येक पंक्ति का मात्राक्रम 11,13 होता है किन्तु वह रोला का चरण नहीं हो सकता है जबकि रोला के चरण का मात्राभार भी 11,13 ही होता है ! कारण यह है की दोनों के लय भिन्न होती है l अस्तु रोला को दो सोरठा के समान समझ लेना नितांत भ्रामक है l

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