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रोशनी पर कविता -रूपेश कुमार

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रोशनी पर कविता

प्यार का दीपक ज़लाओ इस अंधेरे मे ,
रुप का जलवा दिखाओ इस अंधेरे मे ,
दिलो का मिलना दिवाली का ये पैगाम ,
दुरिया दिल का मीटाओ इस अंधेरे मे !

अजननी है भटक न ज़ाए कही मंजिल ,
रास्ता उसको सुझाओ इस अंधेरे मे ,
ज़िन्दगी का सफर है मुश्किल इसलिए ,
कोई हमसफर हमदम बनाओ इस अंधेरे मे !

हाथ को न हाथ सुझे आज का ये दौर ,
रोशनी बन जगमगाओ इस अंधेरे मे ,
अंध विश्वासो के इस मन्दिर मजारो मे ,
सत्य की शमा ज़लाओ इस अंधेरे मे !

रोशनी बन जगमगाओ इस अंधेरे मे !

~ रूपेश कुमार ©
विज्ञान छात्र एव युवा साहित्यकार
कविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद

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