रोटी पर कविता

रोटी पर कविता

सांसरिक सत्य तो
यह है कि
रोटी होती है
अनाज की
लेकिन भारत में रोटी
नहीं होती अनाज की
यहाँ होती है
अगड़ों की रोटी
पिछड़ों की रोटी
अछूतों की रोटी
फलां की रोटी
फलां की रोटी
और हां
यहाँ पर
नहीं खाई जाती
एक-दूसरे की रोटी

-विनोद सिल्ला

No Comments
  1. Rampaul Indora says

    Sahi baat sir, smaaj ki sachai

  2. SARDANAND RAJLI says

    बहुत बढ़िया सर

  3. विनोद सिल्ला says

    धन्यवाद रामपाल इंदौरा व सरदानंद जी

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