KAVITA BAHAR
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चांद पर कविता

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चांद पर कविता

सफेद चांद धवल चन्द्र रात्रि में
आए जब श्वेत मेघों पे ,
देखते ही बनता है नजारा
चांदी जैसा मेघ चमकता
लगता है बड़ा ही प्यारा ।
खो जाता हूं मनोहर दृश्य में ।


धवल चन्द्र रात्रि में
आए जब श्वेत मेघों पे ।
चंचल चितवन पंछी चकोरा
देख चांद का रूप वो गोरा
नजर कभी ढूंढने न देता
घूरे बैठ अथक डाल पे ।

धवल चन्द्र रात्रि में
आए जब श्वेत मेघों पे ।
चांदी जैसे चमक रहे
तोतिया तरूओं के पत्ते
चंपा जूही के पौधों पर
खिले श्वेत फूलों के गुच्छे
धवल चन्द्र रात्रि में
आए जब श्वेत मेघों पे ।


ऐसा मनोहर चित्र प्यारा
शायद ना हो कोई दूसरा
देख कर करता अभिनन्दन
फिर आंखें बंद कर ऊतारूं मन में
धवल चन्द्र रात्रि में
आए जब श्वेत मेघों पे ।
                 -0-                                
नवलपाल प्रभाकर “दिनकर”

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