कविता 10 समता बिन मानवता- मनीभाई नवरत्न

कविता 10
समता बिन मानवता
यह सोच हैरान हूं
कि इंसान है सबसे बेहतर ।
हां मैं परेशान हूं,
इंसान मानता खुद को श्रेष्ठतर।
क्या सचमुच में महान हैं?
या निज दशा से अनजान हैं।
अन्य प्राणियों में नहीं है
धर्म,जाति देश काल की भेदभाव।
अन्य प्राणियों में कहां है ?
रंग-रुप भाषाई अनुरूप बर्ताव ।
यह इंसानों की उपज है
अमीरी गरीबी की रेखा ।
क्या सृष्टि में ऐसा
कोई अजब प्राणी देखा ।
निंदनीय है संपन्न वर्ग
जिसके नजरों में भुखमरी,गरीबी है ।
चिंतनीय है यह मुद्दा
जिसके पलड़े में लाचारी, बदनसीबी है ।
ये कैसा व्यवस्था बना
गुलामी का भयंकर रूप है ।
भाग्य में किसी का आजीवन छांव
तो किसी दामन में तपती धूप है ।
समता बिन मानवता ,
मृग मरीचिका तुल्य है ।
कहीं हो ना जाए
जीवन संघर्ष
आखिर सबके लिए जीवन बहुमूल्य है।
मनीभाई”नवरत्न”
§§§§§§§§

(Visited 1 times, 1 visits today)

मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

प्रातिक्रिया दे