KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

संसद ल सड़क म लगा के तो देख

गुरुजी कस पारा म पढ़ा के तो देख, अरे ! संसद ल सड़क म लगा के तो देख। गिंजरथे गुरु ह गली म पुस्तक ल धर के, बटोरे हे लईकन ल मास्टर गाँव भर के।

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संसद ल सड़क म लगा के तो देख

गुरुजी कस पारा म पढ़ा के तो देख,
अरे ! संसद ल सड़क म लगा के तो देख।

गिंजरथे गुरु ह गली म पुस्तक ल धर के,
बटोरे हे लईकन ल मास्टर गाँव भर के।

जनता के हक ल बगरा के तो देख।
गुरुजी कस पारा म पढ़ा के तो देख,
अरे ! संसद ल सड़क म लगा के तो देख।

हमला भरोसा हे किसान अउ नागर म,
माथा गंगा बोहावथे मंगलू के जांगर म।
तर जाही चोला पसीना म नहा के तो देख।
गुरुजी कस पारा म पढ़ा के तो देख,
अरे ! संसद ल सड़क म लगा के तो देख।

बक नई फूटै अब तो मुँह म तोपना हे,
दुश्मन ल देश के बाडर म रोकना हे।
पहिली करोना के भूत ल भगा के तो देख।
गुरुजी कस पारा म पढ़ा के तो देख,
अरे ! संसद ल सड़क म लगा के तो देख।

लंका ह चमकत हे पूछी ह जरगे,
मँहगी के आगी म भूख ह मरगे।
साग भाजी हरियर मँगा के तो देख।
गुरुजी कस पारा म पढ़ा के तो देख,
अरे ! संसद ल सड़क म लगा के तो देख।

भासन म देश के रोजगार जगाना हे।
बूता कोनो माँगे तव घंटी बजाना हे।
अपन घर म खिलौना बनाके तो देख।
गुरुजी कस पारा म पढ़ा के तो देख।
अरे ! संसद ल सड़क म लगा के तो देख।

अनिल कुमार वर्मा

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