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हिन्दी कुंडलियां : सरगम विषय

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हिन्दी कुंडलियां : सरगम विषय


सरगम है जानो सदा, सप्तसुरों का साज।
पाकर स्वर संगीत को , मिले नयी परवाज ।
मिले नयी परवाज, साधना सप्त सुरों में।
करें शारदा वास, हमारे ही अधरों में ।
कहे पर्वणी दीन, बने स्वर नाद विहंगम ।
अद्भुत संगम गीत, सजे मधुरिम है सरगम।।

सरगम के जब सुर छिड़े, जीवन मधुबन मान।
अंतः उर के वाटिका ,खिले सुमन है जान।
खिले सुमन है जान, मधुर संगीत सुनाते ।
प्रीत रंग में रंग, सभी सुर ताल मिलाते ।
कहे पर्वणी दीन, गीत जीवन का संगम।
जीवन की झंकार, गीत गाते हैं सरगम।।

सरगम के सुर सप्त से, बने मधुर संगीत।
अंतर्मन आवाज दे, गीत जगाए प्रीत।
गीत जगाए प्रीत , करें ईश्वर आराधन ।
टूटे हृदय विकार, सदा पुलकित हो तन-मन ।
कहे पर्वणी दीन, जगत गीतों का संगम ।
छेड़े सुर संग्राम ,बने सुख दुख के सरगम।।

पद्मा साहू पर्वणी
खैरागढ़ छत्तीसगढ़