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साथ रहे जब घर परिवार – शिवकुमार पटेल

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साथ रहे जब घर परिवार


जीवन भी मुश्किल से मिलता , मुश्किल जीवन का आधार ,
भरा पूरा सा लगता जग में , हंसी – खुशी हो जब परिवार ,

जीवन है संघर्षों का मेला , बदलते सबके सोंच विचार ,
जलन भावना ऐसी बढ़ती , टूट रहें है घर परिवार ,

सोंच बदल लें आओ हम सब , जीवन के बस दिन हैं चार ,
नही अकेला आगे बढ़ता , सोंचे हम सब बारम्बार ,

कड़ी बढ़ाएं मिलकर आओं , मूल्यों का दें सबको उपहार ,
सीखें अपने बच्चे मिलकर , भरा पूरा हो घर संसार ,

काम करें ना कोई ऐसा , सोंच समझकर करें विचार ,
बड़े बुर्जग हैं जो भी हमसे ,चाहें बस आदर – सत्कार ,

बदलें अपना सोंच हमारा , बदलें हम अपना व्यवहार ,
देख चुके हमसें भी ज्यादा ,जीवन जीया कई प्रकार ,

आशीर्वाद से हम सब फूलें ,बना रहे यह प्यार – दुलार ,
एक रहे तो फूल खिलेंगे , फिर आएगी नई बहार ,

फूलों की बगिया महकेगी , फूल खिलेंगे कई हजार ,
कहीं गलत न हम कर बैठे , टूटे न प्यारा – संसार ,

काम आते सब एक दूजे के , भरा पूरा हो जब परिवार ,
आओं मिल सब काम करें हम , बदलें अपना व्यवहार ,

कद करें हम एक दूजे की , अपनाएं अपनों को फिर इस- बार,
टूटे न फिर कभी किसी का , बदलें अपना सोंच विचार ,

बदल गया जो सोंच हमारा , सुधर जाएगा यह संसार ।
तोड़ सके न कोई हमको , साथ रहे जब घर परिवार ।


युवा कवि एवं साहित्यकार
शिव कुमार पटेल , ग्राम – तेलीपाली ,पोस्ट – लोहरसिंग ,जिला – रायगढ़( छ. ग.)
ईमेल- [email protected]

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2 Comments
  1. शिव पटेल says

    धन्यवाद

  2. Amita Gupta says

    तोड़ सके ना कोई हमको,साथ रहे जब घर परिवार
    उम्दा लेखन🙏🏻