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साथ-साथ पर कविता- रामनाथ साहू ननकी

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साथ-साथ पर कविता

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सम्मुख यूँ बैठो रहो ,
जीवन जाये बीत ।
मुक्त भाव से गा सकें ,
सिर्फ प्यार के गीत ।।
सिर्फ प्यार के गीत ,
गढ़ें हम गीत वफा के ।
मानस अंकित चित्र ,
चले हम इसी अदा से ।।
कह ननकी कवि तुच्छ ,
सहेंगे हर इक सुख दुख ।
सपने होंगे सत्य ,
रहो जो मेरे सम्मुख ।।

~ रामनाथ साहू ” ननकी “
मुरलीडीह

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