संवाद पर कविता – सुकमोती चौहान रुचि

संवाद


तुमसे कर संवाद, सुकूं मन को मिलता है |
मधुर लगे हर भाष्य, सुमन मन में खिलता है |
कर्णप्रिय हर बात, प्रेरणा देती हरदम |
करके जिसको याद, दूर हो जाती है गम ||
उत्प्रेरक संवाद सब, नित्य सँजोया तुम करो |
कठिन समय में याद कर, सत्य राह नित तुम वरो ||

करके नित संवाद, हृदय को हल्का कर लो |
करके मन की बात, प्रेम जीवन में भर लो ||
सोच समझ कर बोल, अमर होती है वाणी |
इसका प्रखर प्रभाव, रहे युग युग कल्याणी |
सोच समझ कर बोलना, खट्टा मीठा बोल है |
हर युग में स्थायी रहा, संवादों का मोल है ||

जब तक है संवाद, खुले रहते हैं रास्ते |
दिखे सुलह की राह, बने रहते हैं वास्ते ||
खत्म हुआ संवाद, खत्म होती सब राहें |
टूटी सब उम्मीद, सिर्फ भरते हैं आहें ||
संवादों का सिलसिले, बंद न होने चाहिए |
नफरत होता है क्षणिक, कुछ दिन धीरज धारिए ||

सुकमोती चौहान रुचि

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