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सच्चा ज्यूरी – रामनाथ साहू ” ननकी “

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सच्चा ज्यूरी – रामनाथ साहू ” ननकी “

दीदार जरूरी है ।
जगत नियंता प्रिय प्रतिपालक ,
मुझसे क्यों दूरी है ।।

परम प्रकाशक कण -कण के ,
अति अद्भुत नूरी है ।
बस आभास करा दो अपना ,
अब क्या मगरूरी है ।।

काँटों में भी प्यारा अनुभव ,
अपनापन तूरी है ।
तम भी आनंद प्रदायक हो ,
आत्मसात पूरी है ।।

तेरी रहमत से दिन रातें ,
मेरी सिंदूरी है ।
तुझे याद कर नृत्य करे नित ,
अब चित्त मयूरी है ।।

घनानंद हे आकर बरसो ,
कौसुम कस्तूरी है ।
अपने लायक मुझे बना लो ,
सच्चा तू ज्यूरी है ।।


रामनाथ साहू ” ननकी “
मुरलीडीह ( छ. ग. )

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