KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

क्रांति की सेदोका रचना

0 208

क्रांति की सेदोका रचना

जमाना झूठा
बना साधु इंसान
बेच रहा ईमान
पैसों के लिए
बन रहा हैवान
होता  है बदनाम।।

घिसे किस्मत
चप्पल की तरह
बदलता इंसान
क्षण भर में
बन जाता हैवान
पैसों के लालच में।।

मां की मूरत
लगे खूबसूरत
चंद्रमा की तरह
रौशन करें
बच्चों के जीवन से
छंटता अंधियारा।।

बने अमीर
बेचकर जमीर
कमाता है रुपया
आज इंसान
चैन के तलाश में
खो बैठा है खुशियां।।

बगैर वस्त्र
सड़क के किनारे
ठिठुर रहा बच्चा
कठिन घड़ी
कोई न देता साथ
जरूरत के वक्त।।

सड़क पर
पेपरों से लिपटा
अबोध बच्चा मिला
सूरत प्यारा
किस्मत का है मारा
है कोई बेसहारा।।

होते सबेरे
खगों का कलरव
लगता बड़ा न्यारा
नन्हा परिंदा
भर रहा उड़ान
गगन की तरफ।।

क्रान्ति, सीतापुर, सरगुजा छग

Leave A Reply

Your email address will not be published.