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नर्स दिवस पर कविता: सेवाभावी परिचारिका – महदीप जंघेल

यदि डॉक्टर भगवान का रूप है,
तो नर्स भी देवी का रूप है।
जो हर पल मां के समान मरीजों की देखभाल करती है। उनको मेरा सादर प्रणाम

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नर्स दिवस पर कविता: सेवाभावी परिचारिका


हर वक्त खड़ी रहती,
हर वक्त डटी रहती।
हौसलों की उड़ान भरी रहती,
उम्मीदों को पंख देती।
अच्छी व सच्ची जिसकी होती भूमिका,
वो है सेवाभावी परिचारिका।

दुःख व संताप हरती,
मरीजों की देखभाल करती।
बुरे वक्त में साथ रहती,
रुग्णो को नवजीवन देती।
सेवा की है जो संचालिका,
नित सेवारत रहती परिचारिका।

रुग्णों की नित सेवा कर,
अपना फर्ज निभाती ।
मां,और पत्नी का भी,
अपना धर्म निभाती।
कर्तव्य पथ पर अडिग ,
साहस,धैर्य,दया की मणिकर्णिका।
नित सेवाधर्म निभाती,
साहसी बहादुर परिचारिका।

हर पल जो साहस जगाती,
उम्मीदों की सुमन खिलाती।
नवजीवन का संचार कराती,
दया और करुणा लुटाती।
मां का प्रेम दिखाती परिचारिका।

सेवा धर्म हर फर्ज निभाती,
खिलता नित नव चमन।
मुरझाए जो फूल खिलाती ,
उनको मेरा शत शत नमन।


📝महदीप जंघेल
खमतराई, खैरागढ़

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