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शादी पर कविता- सुकमोती चौहान

शादी के वातावरण को बयां करती कविता

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शादी पर कविता- सुकमोती चौहान



दीदी की है आज , बराती द्वारे आई ।
देखो बाजे बैण्ड , फटाखे फोड़े भाई ।।
देखो बेटा बाप , साथ नाचे संगाती ।
मस्ती में हो चूर , नाचते दादा नाती ।
दूल्हा राजा साथ में , जीजा बैठा पास में ।
सारी रश्मों को निभा , रिश्ता विश्वास में ।

तीखी मिर्ची डाल , पकौड़े साली लाई ।
चिल्लाते हैं खूब , देख दूल्हा के भाई ।
छोटी छोटी रश्म , भरे शादी में मस्ती ।
मीठी छूरी जान , प्रेम की देखो हस्ती ।
रिश्तेदारों से भरा , शादी की वेदी सजी ।
शादी भी सम्पन्न ये , ताली ही ताली बजी ।

शादी की ये रीत , खुशी की हैं बौछारें ।
जन्मों का संबंध , लगे हैं प्यारे प्यारे ।
दो राही हैं साथ , सात लेते हैं फेरे ।
देते हैं आशीष , नये जोड़े को घेरे ।
हाथों में है मेंहदी , दो आँखों में ख्वाब है ।
देते आशीर्वाद ये , रिश्ता ये नायाब है ।


*सुकमोती चौहान “रुचि”*
*बिछिया,महासमुन्द*

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