शहीद दिवस विशेष कविता

शहीद दिवस विशेष कविता

क्या शहीद दिवस मना लेना;
इस पर कोई कविता बना लेना;
तस्वीर स्मारक में फूल चढ़ा देना;
बच्चों को उनके बारे में पढ़ा देना;
सच्ची श्रद्धांजलि हो सकती है?
क्या आज जरूरत नहीं हमें,
भगत,सुखदेव,राजगुरू बनने की;
भारतमाँ के लिये सर्वस्व लुटाने की;
उनके विचारों को अमल में लाने की;
उनके सपनों के भारत बनाने की ?
हम चाहते तो हैं देश आगे बढ़े;
हम चाहते तो हैं दुश्मनों से लड़ें;
हम चाहते तो हैं इतिहास  गढ़े,
जिसे बच्चा बूढ़ा जवान फिर से पढ़े।
पर क्या हम चाहते हैं तकलीफें उठाना;
वतन के लिये अपना सर्वस्व लुटाना ?
हमें अपने कामों से फुरसत कहाँ ?
शहीदों सा देश के लिये मुहब्बत कहाँ?
अरे मनी! छोटा-सा घर से बाहर निकल।
और देख जरा ! एक बड़ा घर “देश”,
जहाँ मनती है धूमधाम से दीवाली और ईद।
जिसके खातिर फाँसी चूमें अपने वीर शहीद।

(रचयिता:- मनी भाई )
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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

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