KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

मां तू शक्ति स्वरूपा है

प्रस्तुत कविता मां दुर्गा के विविध रूप को आधार बनाकर लिखी गई है। जिसे चारूमित्रा ने लिखी है।

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प्रस्तुत कविता मां दुर्गा के विविध रूप को आधार बनाकर लिखी गई है। जिसे चारूमित्रा ने लिखी है।

मां तू शक्ति स्वरूपा है
मां दुर्गा

मां तू शक्ति स्वरूपा है

मां तू शक्ति स्वरूपा है –
तू दुर्गा है
दुर्गा दुर्गतिनाशिनी
तू मातृरूपा है
तू ब्रह्मांड -निर्मात्री है
तू हर रूप में पूजनीय है
तू हर युग में वंदनीय है
तू शिव-रूपा है
तू चामुंडा है
तेरी विशाल भुजाओं में
सैकड़ों हाथियों का बल है
तू महिषासुरमर्दिनी है
तू चंड -मुंड संघारिणी है
तू काली है
तूने रक्तबीज के शोणित का पान किया
तू मुक्ति दिलाने वाली है
तू अधर्म -नाशिनी है
तू धर्म -व्यापिनी है
तू शत्रु-नाशिनी है
तू दुख-तारिणी है
तू नारी -शक्ति है
मां तू अभेद्य है
अदम्य है , अद्वितीय है
तू नारी शक्ति का आगर है
तेरी महिमा अपरंपार है
मां के रूप को मेरा बारंबार प्रणाम है।

चारूमित्रा

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